चेतना/जीव
चेतन जीव से ही पदार्थ की उत्पत्ति होती है , जबकि आधुनिक वैज्ञानिक पदार्थ से जीव/ चेतना की उत्पत्ति मानते हैं। सामान्य रूप से यह देखने में आता है कि शरीर में ही चेतन सत्ता से बाल और नाखून जैसे पदार्थ जिनमें चेतना नहीं होती है पैदा होते हैं। जबकि बाल या नाखून से किसी जीवित वस्तु का निर्माण या उसमें चेतना नहीं पैदा होती। शरीर के सेल ( कोष) चेतन सत्ता से ही पैदा होते रहते हैं और बाद में नष्ट होते रहते हैं जबकि नष्ट सेल (कोषों) से किसी जीव या जीवित वस्तु की उत्पत्ति नहीं होती है। जहां भी चेतना का निर्माण होता है वहां चेतना ही होती है। जब चेतना अपना अस्तित्व सिकोड़ती है तो शेष रूप में अचेतन पदार्थ ही बच रहता है।
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