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भारतीय दिनदर्शिका या संकल्प मंत्र

संकल्प मंत्र-    ॐ विष्णुर्विष्णुविर्ष्णु ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे उत्तर प्रदेश, ८-ए, लक्ष्मणपुरी फैजाबाद  मार्ग, लखनऊ स्थान नामे -----परिधावी नाम विक्रमसंवत्सर २०७६  चैत्र मासे शुक्ल  पक्षे प्रतिपदा  तिथौ-शैनेश्चर वासरे कश्यप गोत्र:ऽहम्  गोपाल कृष्ण सिंह सपरिवारस्य प्रात: ( मध्याह्ने- सायं) सिद्ध्यर्थश्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं श्रीभगवत्प्रीत्यर्थं  च - -----(अमुक) कर्म करिष्ये ।

उपवास

उपवास    प्रत्येक मनुष्य को उपवास नियम से अवश्य करना चाहिए। उप का अर्थ है निकट और वास का अर्थ है रहना। इस प्रकार मनुष्य उपवास में अपने आत्म-तत्व के निकट पहुंचता जाता है। लगभग दुनिया के सभी धर्मों में उपवास रखना जरूरी बताया गया है। उपवास के समय(पेट को खाली रखकर) हम पंच तत्वों में से आकाश तत्व (शून्य) का सेवन करते हैं। पंचतत्व में सर्वप्रथम आकाश तत्व ही उत्पन्न हुआ है और उसके पश्चात उसी से अन्य तत्व (सभी कुछ) भी पैदा हुए हैं। उपवास में शरीर स्वयं ही वह दवा उत्पन्न करता है जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। उपवास से ही मनुष्य की आयु बढ़ती है। स्वस्थ व्यक्ति ही ईश्वर की प्रार्थना विधिवत कर सकता है। स्वस्थ व्यक्ति ही उत्कृष्ट ज्ञान (बौद्धिक ज्ञान) का अर्जन कर सकता है। स्वस्थ व्यक्ति ही अपने कार्य को कुशलता पूर्वक कर सकता है। हम सामान्य रूप से यह स्वयं देखते हैं कि पेट भर जाने पर आलस्य अथवा निद्रा आने लगती है, जबकि खाली पेट रहने पर बौद्धिक स्तर का कार्य भली प्रकार कर सकते हैं और अन्य कार्य भी कुशलता पूर्वक कर लेते हैं। पेट भरा होने पर शरीर के सभी आवश्यक अंग केवल खाना पचाने...