लक्ष्य (टारगेट) लक्ष्य सदैव अपने समर्थ्य एवं पुरुषार्थ के अनुसार ही बनाना चाहिए। लक्ष दूसरों के सहारे नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इसमें सदैव यह डर बना रहता है की यदि दूसरे हमारा साथ किसी कारण से न दे पाए तो लक्ष्य पूरा नहीं होगा और इस कारण व्यक्ति स्वयं ही तनाव में बना रहेगा। ऐसी स्थिति में इस प्रकार का लक्ष्य जो दूसरों के सहारे बनाएंगे उसमें सदैव ही हम अपने को तनावपूर्ण बना लेंगे और तनावपूर्ण रहने से हमारी अधिकांश ऊर्जा उसी में नष्ट हो जाती है। अतः लक्ष्य तो बनाएं परंतु उसमें तनाव(डिप्रेशन) न आने दें, हौसला रखें, और उसमें वैकल्पिक अल्टरनेट तरीके भी अपने मन में रख लेना चाहिए, इससे विपरीत परिस्थितियों में भी आप अपना लक्ष्य पूर्ण करने में सफल रहेंगे। इससे आपका टारगेट शांति से खुशी से पूर्ण हो जाता है बल्कि उससे ऊपर भी चला जाता है।