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ईश्वर का अनुभव कैसे करें

ईश्वर को अनुभव करने के लिए गुड कंडक्टर होना आवश्यक है बैड कंडक्टर होने से ईश्वर का अनुभव नहीं हो पाता। बैड कंडक्टर का अर्थ नकारात्मकता भाव या नास्तिकता का भाव। यह भाव भी कुछ दिन बाद प्रयास से धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

लक्ष्य कैसे बनाएं

लक्ष्य (टारगेट)         लक्ष्य सदैव अपने समर्थ्य एवं पुरुषार्थ के अनुसार ही बनाना चाहिए। लक्ष दूसरों के सहारे नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इसमें सदैव यह डर बना रहता है की यदि दूसरे हमारा साथ किसी कारण से न दे पाए तो लक्ष्य पूरा नहीं होगा और इस कारण व्यक्ति स्वयं ही तनाव में बना रहेगा। ऐसी स्थिति में इस प्रकार का लक्ष्य जो दूसरों के सहारे बनाएंगे उसमें सदैव ही हम अपने को तनावपूर्ण बना लेंगे और तनावपूर्ण रहने से हमारी अधिकांश ऊर्जा उसी में नष्ट हो जाती है। अतः लक्ष्य तो बनाएं परंतु उसमें तनाव(डिप्रेशन) न आने दें, हौसला रखें, और उसमें वैकल्पिक अल्टरनेट तरीके भी अपने मन में रख लेना चाहिए, इससे विपरीत परिस्थितियों में भी आप अपना लक्ष्य पूर्ण करने में सफल रहेंगे। इससे आपका टारगेट शांति से खुशी से पूर्ण हो जाता है बल्कि उससे ऊपर भी चला जाता है।