ईश्वर को अनुभव करने के लिए गुड कंडक्टर होना आवश्यक है बैड कंडक्टर होने से ईश्वर का अनुभव नहीं हो पाता। बैड कंडक्टर का अर्थ नकारात्मकता भाव या नास्तिकता का भाव। यह भाव भी कुछ दिन बाद प्रयास से धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।
मनुष्य अपनों से हारने में खुशी अनुभव करता है, परंतु यदि अपने से हार जाता है तो उससे उसका आत्मविश्वास कम हो जाता है, कमजोर पड़ जाता है। यहीं से उसके जीवन में हार प्रारंभ हो जाती है।
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