मनु स्मृति--
      मनुस्मृतिमें प्रक्षेप किए गए श्लोकों की भरमार है। प्रक्षेपण के कारण मनुस्मृति का उज्जवल रूप गंदा एवं विकृत हो गया है। परस्पर विरुद्ध प्रसंग विरोध एवं पक्षपात पूर्ण बातों से मनुस्मृति का वास्तविक स्वरूप और उसकी गरिमा विलुप्त हो गई है। इसके कारण इसके प्रति लोगों में अश्रद्धा की भावना घर करती जा रही है।
        वैदिक विद्वानों के द्वारा (१) अंतर्विरोध या परस्पर विरोध, (२)प्रसंग विरोध, (३) विषय विरोध या प्रकरण विरोध, (४) अवांतर विरोध, (५) शैली विरोध, (६) पुनरुक्ति, (७)वेद विरोध। इन सभी मानदंडों एवं मनुस्मृति के अंतर साक्ष्य के आधार पर विस्तृत अध्ययन करने पर यह निष्कर्ष निकाला है कि मनुस्मृति के 2685 उपलब्ध श्लोक में से 1471 श्लोक प्रक्षेपित हैं और 1214 श्लोक ही मौलिक पाए गए हैं। यद्यपि यह अंतिम नहीं है।
   (टिप्पणी-प्रक्षिप्त श्लोकों की सूची अलग से दी जाएगी।)

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