वेद की आज्ञा

🌿📚 वेद की आज्ञा
🔶  *पहली आज्ञा  :*
🔸  अक्षैर्मा दिव्य: (ऋ 10/34/13)
🔹  अर्थात् "जुआ मत खेलो ।"
🔶  *दूसरी आज्ञा  :*
🔸  मा नो निद्रा ईशत मोत जल्पिः (ऋ 8/48/14)
🔹  अर्थात् "आलस्य, प्रमाद और बकवास हम पर शासन न करें ।"
🔶  *तीसरी आज्ञा  :*
🔸  सं गच्छध्वं सं वद्ध्वम (ऋ 10/191/2)
🔹  अर्थात् "मिलकर चलो और मिलकर बोलो ।"
🔶  *चौथी आज्ञा  :*
🔸  कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो में सव्य आहितः
           (अथर्व 7/50/8)
🔹 अर्थात् "मेरे दाएं हाथ में कर्म है और बाएं हाथ में विजय ।
🔶  *पाँचवीं आज्ञा  :*
🔸  उतिष्ठत सं नह्यध्वमुदारा: केतुभिः सह ।
        सर्पा इतरजना रक्षांस्य मित्राननु धावत ।।
                    (अथर्व 11/10/1)
🔹  अर्थात् "हे वीर योद्धाओ ! आप अपने झण्डे को लेकर उठ खड़े हो और कमर कसकर तैयार हो जाओ । हे सर्प के समान क्रुद्ध रक्षाकारी विशिष्ट पुरुषों ! अपने शत्रुओं पर धावा बोल दो ।"
🔶  *छठी आज्ञा  :*
🔸  मिथो विघ्राना उप यन्तु मृत्युम (अथर्व 6/32/3)
🔹  अर्थात् "परस्पर लड़ने वाले मृत्यु का ग्रास बनते हैं और नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं ।"
🔶  *सातवीं आज्ञा  :*
🔸  न तस्य प्रतिमा अस्ति
          (यजुर्वेद 32/3)
🔹  अर्थात् "ईश्वर का कोई प्रतिमा नहीं है ।"
☀  तो आइये, फिर से वेदों की ओर लौट चलें . . . .
और एक सशक्त राष्ट्र और चरित्रवान विश्व का निर्माण करे
*कृण्वन्तो विश्वमार्यम्* ✍

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