हमारे अस्तित्व का वह भाग हमारा हृदय है, जिसके आधार पर हमारा अस्तित्व टिका है, वैसे ही जैसे किसी वृत्त का केंद्र बिंदु होता है। जिसके बिना वृत्त का अस्तित्व नहीं बन सकता। यद्यपि वृत्त के केंद्र बिंदु की लंबाई चौड़ाई मोटाई नहीं होती है फिर भी उसके बिना वृत्त की परिधि की कल्पना भी नहीं हो सकती है ऐसे ही हमारा हृदय भी है। बिना हृदय के हमारा आस्तित्व नहीं हो सकता।
आत्मविश्वास
मनुष्य अपनों से हारने में खुशी अनुभव करता है, परंतु यदि अपने से हार जाता है तो उससे उसका आत्मविश्वास कम हो जाता है, कमजोर पड़ जाता है। यहीं से उसके जीवन में हार प्रारंभ हो जाती है।
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