मंत्र पाठ करें
गति से ऊर्जा पैदा होती है। अतः मंत्र पाठ (अक्षरों का विस्फोट करना) से मंत्रानुसार ऊर्जा पैदा होती है, जो अभीष्ट मंत्र से अभीष्ट फल प्राप्त कराती है। मंत्र पाठ बिना शिक्षा के नहीं हो सकता।शिक्षा का अर्थ पाणिंनी की शिक्षा से है जिससे वर्णों का सही उच्चारण ज्ञान प्राप्त होता है।
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