मेधा सूक्त

मेधा सूक्त --
         यजुर्वेद के इन मंत्रों का जो बालक, विद्यार्थी या जो भी मनुष्य प्रातः एवं प्रतिदिन विद्याध्ययन से पूर्व यथा विधि पाठ करता है वह मेंधावी होता जाता है। (मेधा वह बुद्धि है जो सुने, पढ़े और देखे हुए को धारण करती है, और समय पर प्रगट करती है)।

   सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम।
   सनिं     मेधामयासिषं     स्वाहा ।।१३।।
   या   मेधां   देवगणाः   पितरश्चोपासते।
   तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा।१४।।
   मेधा मे वरुणो ददातु मेधामग्निः प्रजापतिः।
   मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा।।१५।।
   इदं  मे  ब्रह्म  च  क्षत्रं चोभे  श्रियमश्नुताम्।
   मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ।।१६।।
        (शु०यजु० ३२/१३-१६)

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