कर्म एवं भाग्य

पूर्व जन्मों के कर्मों से अर्जित अच्छा बुरा कर्म फल ही इस जन्म का दैव(भाग्य) कहलाता है, और जो इस जन्म में जो अच्छे बुरे कर्म करते हैं यही पुरुषार्थ है। इन्ही दोनों के बला-बल के आधार पर ही हमें इस जन्म में आयु और भोग प्राप्त होता है। अतः ये सदा निश्चित नहीं रहता है। अर्थात् इस जन्म में किया गया अच्छा कर्म और पुरुषार्थ पिछले जन्म के कर्म और पुरुषार्थ से प्राप्त हुए बुरे फल अर्थात अनिष्ट दैव (भाग्य) से बलवान पड़कर अच्छे फल दे सकता है।

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