मनुष्य को आचारवान होना जरूरी है, ज्ञानवान होना उतना जरूरी नहीं है। आचार का अर्थ है, उसका आचरण सभी ओर से नियंत्रित और शास्त्रानुकूल और धर्मानुकूल होना चाहिए, उसमें नैतिकता होनी चाहिए। नैतिकता का अर्थ है नीति का अनुसरण करने वाला।
मनुष्य अपनों से हारने में खुशी अनुभव करता है, परंतु यदि अपने से हार जाता है तो उससे उसका आत्मविश्वास कम हो जाता है, कमजोर पड़ जाता है। यहीं से उसके जीवन में हार प्रारंभ हो जाती है।
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