दुख का मूल कारण
ईश्वर की कही हुई चारों (संहिता) वेद हैं । वेद ही स्वयं प्रमाण है और वे ही मुख्य शब्द प्रमाण हैं। उपनिषद गीता एवं भारतीय दर्शन में इन्हीं की विवेचना है। वेद ही सब सत्य विद्या है, अतः विना सत्य-विद्या के ज्ञान कहां? बिना ज्ञान के उन्नति कैसी ? और उन्नति के न होने से मनुष्य सदा दुख: सागर में ही डूबे रहते हैं। इस प्रकार अज्ञान ही दु:ख और कष्ट का मूल कारण है।
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