ब्रह्म

ब्रह्म किसी का विशेषण नहीं है न तो उसका कोई विशेषण है सत्यम्- ज्ञानम्- अनन्तम् स्वयं ही ब्रह्म है। ब्रह्म से यह गुण अलग नहीं है, जैसे सूर्य प्रकाशक है, यह सही नहीं है सूर्य के सामने जो पड़ता है, वह प्रकाशित होता है। जैसे चंदन की गंध चंदन से अलग नहीं होती है। चंदन की गंध भी चंदन ही है। इसीलिए ब्रह्म को जानने के बाद कुछ जानने को शेष नहीं बचता है।

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