यज्ञ कर्म-१:

यज्ञ कर्म-१
   १- प्रजापति ब्रह्मा ने कल्प के आदि में यज्ञ सहित प्रजाओं को रच कर उनसे कहा कि तुम लोग इस यज्ञ के द्वारा वृद्धि को प्राप्त होओ और यह यज्ञ तुम लोगों को इच्छित भोग प्रदान करने वाला हो।
   सहयज्ञा: प्रजा: सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापति: ।
   अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्ति्वष्टकामधुक् ।।
        (गीता-३/१०)

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