अपने मूल से जुड़े रहना
इस ब्रह्मांड में सभी कुछ अपने मूल से जुड़ा हुआ है जिसके कारण वह दोलित होता रहता है(पेंडुलम की तरह)। वह उससे एक सीमा से दूर नहीं जा सकता और अगर वह उस सीमा से दूर चला गया तो वह लौट नहीं सकता उसके साथ ही उसका विनाश होना भीअवश्यंभावी है, उदाहरणत: मनुष्य का स्वास, सोलर सिस्टम में सभी ग्रहों नक्षत्रों तारों की गति और आकाशगंगा की गति और परमाणुओं की भी गति।
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