समाधि
समाधि:-
प्रगाढ़ ध्यान की अवस्था ही समाधि है, या इसे ऐसे कह सकते हैं कि एकाग्रता की पराकाष्ठा समाधि है।
समाधि की अवस्था में ध्यान में कोई विषय नहीं रहता और ध्यान एक ही बिंदु पर एकाग्र होता है। शरीर तथा मन में स्थिरता बनी रहती है। समाधि निद्रा से अलग है निद्रा में शरीर शिथिल हो जाता है और शारीरिक चैेतन्यता शिथिल पड़ जाती है। जबकि समाधि की अवस्था में शारीरिक शिथिलता नहीं रहती है परंतु ध्यान एक ही स्थान पर एकाग्र रहता है। चंचलता सून्य समाधि अवस्था में चित्त के सामने निरावरण प्रकाश का आविर्भाव होने पर विश्व में कुछ भी अप्रत्यक्ष नहीं रह जाता है तब सब कुछ नित्य वर्तमान रूप में उपलब्ध हो सकता है।
प्रगाढ़ ध्यान की अवस्था ही समाधि है, या इसे ऐसे कह सकते हैं कि एकाग्रता की पराकाष्ठा समाधि है।
समाधि की अवस्था में ध्यान में कोई विषय नहीं रहता और ध्यान एक ही बिंदु पर एकाग्र होता है। शरीर तथा मन में स्थिरता बनी रहती है। समाधि निद्रा से अलग है निद्रा में शरीर शिथिल हो जाता है और शारीरिक चैेतन्यता शिथिल पड़ जाती है। जबकि समाधि की अवस्था में शारीरिक शिथिलता नहीं रहती है परंतु ध्यान एक ही स्थान पर एकाग्र रहता है। चंचलता सून्य समाधि अवस्था में चित्त के सामने निरावरण प्रकाश का आविर्भाव होने पर विश्व में कुछ भी अप्रत्यक्ष नहीं रह जाता है तब सब कुछ नित्य वर्तमान रूप में उपलब्ध हो सकता है।
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